श्री कालभैरवाष्टकम्
श्री कालभैरवाष्टकम्
#श्रीकालभैरवाष्टकम् #श्री #कालभैरवाष्टकम् #शिवपुराण यह भगवान शिव के कालभैरव स्वरूप की स्तुति है।
॥ श्लोक १ ॥
देवराजसेव्यमानपावनाङ्घ्रिपङ्कजं
व्यालयज्ञसूत्रमिन्दुशेखरं कृपाकरम्।
नारदादियोगिवृन्दवन्दितं दिगम्बरं
काशिकापुराधिनाथ कालभैरवं भजे॥ १॥
सरल हिंदी अर्थ
मैं काशी के अधिपति भगवान कालभैरव की भक्ति करता हूँ, जिनके पवित्र चरणकमलों की देवताओं के राजा भी सेवा करते हैं, जो सर्प को यज्ञोपवीत के रूप में धारण करते हैं, जिनके मस्तक पर चंद्रमा सुशोभित है, जो करुणामय हैं, नारद आदि योगियों द्वारा वंदित और दिगम्बर हैं।
भावार्थ
कालभैरव भगवान शिव का रक्षक और उग्र स्वरूप हैं। वे भक्तों की रक्षा करने वाले तथा अधर्म और भय का नाश करने वाले माने जाते हैं।
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॥ श्लोक २ ॥
भानुकोटिभास्वरं भवाब्धितारकं परं
नीलकण्ठमीप्सितार्थदायकं त्रिलोचनम्।
कालकालमम्बुजाक्षमक्षशूलमक्षरं
काशिकापुराधिनाथ कालभैरवं भजे॥ २॥
सरल हिंदी अर्थ
मैं काशी के अधिपति कालभैरव की भक्ति करता हूँ, जो करोड़ों सूर्यों के समान प्रकाशमान हैं, संसार-सागर से पार लगाने वाले हैं, नीलकंठ और त्रिनेत्रधारी हैं, भक्तों की इच्छाएँ पूर्ण करने वाले हैं तथा स्वयं काल के भी काल हैं।
भावार्थ
काल के भी काल भगवान भैरव हमें मृत्यु और समय के भय से ऊपर उठकर परम सत्य का स्मरण करने की प्रेरणा देते हैं।
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॥ श्लोक ३ ॥
शूलटङ्कपाशदण्डपाणिमादिकारणं
श्यामकायमादिदेवमक्षरं निरामयम्।
भीमविक्रमं प्रभुं विचित्रताण्डवप्रियं
काशिकापुराधिनाथ कालभैरवं भजे॥ ३॥
सरल हिंदी अर्थ
मैं #काशी के अधिपति #कालभैरव की भक्ति करता हूँ, जिनके हाथों में त्रिशूल, टंक, पाश और दंड हैं; जो समस्त सृष्टि के आदि कारण, श्यामवर्ण, आदि देव, अविनाशी और निरोग हैं तथा जिनका पराक्रम अत्यंत प्रचंड है और जिन्हें तांडव प्रिय है।
भावार्थ
यहाँ कालभैरव के शक्ति, पराक्रम और तांडवप्रिय स्वरूप का ध्यान किया गया है।
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॥ श्लोक ४ ॥
भुक्तिमुक्तिदायकं प्रशस्तचारुविग्रहं
भक्तवत्सलं स्थितं समस्तलोकविग्रहम्।
विनिक्वणन्मनोज्ञहेमकिङ्किणीलसत्कटिं
काशिकापुराधिनाथ कालभैरवं भजे॥ ४॥
सरल हिंदी अर्थ:
मैं काशी के अधिपति #कालभैरव की भक्ति करता हूँ, जो भोग और मोक्ष दोनों प्रदान करने वाले, सुंदर स्वरूप वाले, भक्तों से प्रेम करने वाले और समस्त लोकों में व्याप्त हैं। उनकी कमर में बंधी स्वर्णिम किङ्किणियाँ मधुर ध्वनि करती हैं।
भावार्थ:
कालभैरव भक्त को सांसारिक जीवन में धर्मपूर्ण सुख और अंततः मोक्ष की ओर ले जाने वाले माने जाते हैं।
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॥ श्लोक ५ ॥
धर्मसेतुपालकं त्वधर्ममार्गनाशकं
कर्मपाशमोचकं सुशर्मदायकं विभुम्।
स्वर्णवर्णशेषपाशशोभिताङ्गमण्डलं
काशिकापुराधिनाथ कालभैरवं भजे॥ ५॥
सरल हिंदी अर्थ:
मैं काशी के अधिपति कालभैरव की भक्ति करता हूँ, जो धर्म की मर्यादा की रक्षा करते हैं, अधर्म के मार्ग का नाश करते हैं, कर्मों के बंधन से मुक्त करने वाले और कल्याण प्रदान करने वाले हैं।
भावार्थ:
भैरव का यह स्वरूप धर्म की रक्षा और अधर्म के विनाश का प्रतीक है।
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॥ श्लोक ६ ॥
रत्नपादुकाप्रभाभिरामपादयुग्मकं
नित्यमद्वितीयमिष्टदैवतं निरञ्जनम्।
मृत्युदर्पनाशनं करालदंष्ट्रमोक्षणं
काशिकापुराधिनाथ कालभैरवं भजे॥ ६॥
सरल हिंदी अर्थ:
मैं #काशी के अधिपति #कालभैरव की भक्ति करता हूँ, जिनके चरण रत्नजड़ित पादुकाओं की आभा से सुशोभित हैं, जो भक्तों के प्रिय और निर्मल देवता हैं तथा मृत्यु के अहंकार का नाश करने वाले हैं।
भावार्थ:
कालभैरव का स्मरण मृत्यु-भय और अहंकार से मुक्ति का संदेश देता है।
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॥ श्लोक ७ ॥
अट्टहासभिन्नपद्मजाण्डकोशसन्ततिं
दृष्टिपातनष्टपापजालमुग्रशासनम्।
अष्टसिद्धिदायकं कपालमालिकाधरं
काशिकापुराधिनाथ कालभैरवं भजे॥ ७॥
सरल हिंदी अर्थ:
मैं काशी के अधिपति कालभैरव की भक्ति करता हूँ, जिनके प्रचंड अट्टहास से ब्रह्मांड के आवरण भी कंपित हो जाते हैं, जिनकी दृष्टि मात्र से पापों का नाश होता है, जो कठोर अनुशासन वाले हैं, अष्ट सिद्धियाँ प्रदान करने वाले और कपालों की माला धारण करने वाले हैं।
भावार्थ:
यहाँ कालभैरव के उग्र और शक्तिशाली स्वरूप का वर्णन है। उनका स्मरण भीतर के भय, अहंकार और नकारात्मकता को दूर करने की प्रेरणा देता है।
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॥ श्लोक ८ ॥
भूतसङ्घनायकं विशालकीर्तिदायकं
काशिवासलोकपुण्यपापशोधकं विभुम्।
नीतिमार्गकोविदं पुरातनं जगत्पतिं
काशिकापुराधिनाथ कालभैरवं भजे॥ ८॥
सरल हिंदी अर्थ:
मैं काशी के अधिपति कालभैरव की भक्ति करता हूँ, जो भूतगणों के नायक, महान कीर्ति देने वाले, काशी में रहने वाले लोगों के पुण्य-पाप का शोधन करने वाले, नीति के मार्ग के ज्ञाता, सनातन और सम्पूर्ण जगत के स्वामी हैं।
भावार्थ:
#कालभैरव #काशी के क्षेत्रपाल और धर्म के रक्षक माने जाते हैं।
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🌺 फलश्रुति
कालभैरवाष्टकं पठन्ति ये मनोहरं
ज्ञानमुक्तिसाधनं विचित्रपुण्यवर्धनम्।
शोकमोहदैन्यलोभकोपतापनाशनं
ते प्रयान्ति कालभैरवाङ्घ्रिसन्निधिं ध्रुवम्॥
सरल हिंदी अर्थ:
जो भक्त इस सुंदर #कालभैरवाष्टक का पाठ करते हैं, उनके ज्ञान और मुक्ति की साधना में वृद्धि होती है तथा शोक, मोह, दैन्य, लोभ और क्रोध जैसे दोषों का नाश होता है। अंततः वे भगवान #कालभैरव के चरणों की शरण प्राप्त करते हैं।
🔱 ॥ श्री कालभैरवाष्टकम् सम्पूर्णम् ॥
हर हर #महादेव 🙏
#ॐ कालभैरवाय नमः 🔱

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